ରାଜକୀୟ ରଜ


ରାଜକୀୟ ରଜ!
ସଂକ୍ରାନ୍ତି ପୂର୍ବ ପହିଲି ରଜ,
ଖୁସିର ପରବ ଖୁସି ବାଣ୍ଟ
ହୋଇ ସଜବାଜ!

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“ରାଜକୀୟ ରଜ”

ଖୁସିର ପରବ ଖୁସିର ମେଳ,

ସଂକ୍ରାନ୍ତି ଓ ପହିଲି ରଜ,

ରଜ ଦୋଳି ଖେଳ ରଜ ସଜବାଜ!

କେବେ ଖଟା ତ

କେବେ ମିଠା କୋଳି,

ପହିଲି ରଜ ପ୍ରଥମ ମେଳ

ଖୁସିରେ ନାଚି ଗାଇ ଉଠୁଚି

ଉଠୁଚି ପଡ଼ୁଚି ଦାଣ୍ଡ ଅଗଣା;

ଭଙ୍ଗା ଚୁନା ବଟା ପିଠା ଚାଉଳ

ପୋଡ଼ ପିଠା ସଙ୍ଗେ

ମଣ୍ଡା ଆରିସା କାକରା ପୁର

ପିଠା ପଣା ସହ

ରଜ ଭାର ଉପହାର,

ଭଲ ସବୁ ଆଉ ନିଆରା ଲାଗେ

ଯେବେ ହୁଏ ରଜ ମେଳି

ସାଙ୍ଗ ସଖୀ ସଙ୍ଗେ ଖେଳି

ଝୁମି ଝୁମି ରଜ ଦୋଳି।

😇😊💐👌🤟🙏

ପ::

ସରିବ ରଜ

ମନେ ରହିଥିବ

ରଜ ଦୋଳି ଖେଳ

ଖୁସିର ମେଳ

ପରମ୍ପରା ତଥା

ରୀତି ନୀତି କ୍ରମେ

ଚାଲିବ ହଳ

ନା ଖାଦ୍ୟର ଅଭାବ

ନା ଖୁସିର ସୀମା

ହେବ ପ୍ରଚୁର ଅମଳ…

~ © ପ୍ରବୀଣ କୁମାର ପତି

Prabeen Kumar Pati

Bakr-id ईद अल-अधा


बक़र-ईद

ईद अल-अधा
ना काटो कोई बकरा,
बकरी या जानवर
ना पूरा ना आधा!

जानवर = जिसमें हैं जान (जान+वर)

~ प्रवीण कुमार पति

Eid al-Adha
na kaato koii bakraa,
bakrii yaa jaanvar
na puraa naa aadhaa!

The Humanity-Id! Bear it! Yes that Identity. Say Yes to Life. Right to Life.
No Animal Slaughter/Sacrifice please. Slaughter/Killing not at All. Not Whole not even Half.

#Bakr_id #Eid_al_Adha

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~ Prabeen Kumar Pati
~ PSquare

“सावित्री”: अमावस व्रत – मृत जीवित, यम पड़े कम 🙏🙏🙏


#सावित्री:

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#अमावस की वो #रात

जब हो उठा #जीवित

#मानव एक #मृत मृत #शरीर! 🙏🙏🙏

 

सावित्री

एक पतिब्रता पत्नी

के समक्ष

स्वयं यमराज ने भी

थी हार मानी!

आओ सुनाऊँ

#सावित्रीअमावस

रात की वो बात!

जब जीवित हो उठा

एक पत्नी के पति

मानव/पति एक मृत!

पतिव्रता स्त्री

सावित्री

पति सत्यव्रत!

पतिव्रता स्त्री
सावित्री-
पति सत्यव्रत
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नारी का विश्वास, नारी का संकल्पसदसाहस:

सती सावित्री

नारी का विश्वास

नारी का संकल्प

नारी का सदसाहस!

 

सावित्रीअमावस

रात की वो बात!

जब जीवित हो उठा

मानव एक मृत!

 

अमावस रात्रि

राजपूत्रि राजकुमारी सती सावित्री

यम पर जब पड़ी भारी

एक सुदृढ़ पतिब्रता नारी!

 

आम के ऋत में

यम की ना चली,

जब अडिग रही

माँ सती सावित्री!

 

यम काल ओ मृत्यु आज्ञा

और

माँ सती सावित्री की प्रतिज्ञा!

 

सावित्री

एक पतिब्रता पत्नी

के समक्ष

स्वयं यमराज ने भी

थी हार मानी!

 

#अमावस की वो #रात

जब हो उठा #जीवित

#मानव एक #मृत मृत #शरीर! 🙏🙏🙏

 

Screen Shot 2018-05-15 at 10.38.16 PM

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~ प्रबीण कुमार पति

PRABEEN KUMAR  PATI

 

 

KAAVERII…


more than just . more than . My  view.

Any way supreme court order on the 120 yr old dispute is to be out today! #Cauvery #Kaveri

via KAAVERII…

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~ Poet Prabeen

(Prabeen Kumar Pati)

Basant Panchamii – Happy Spring – Season’s Greetings


Oh Goddess SARASWATII!
This Basant Panchamii,

let be far away
let be the end (or fastened beginning of the end)
of the five darknesses –

  1. ignorance & illiteracy, improper education,

  2. wrong & misconception, bad/cuss/cursing-words & foul & filthy language,

  3. fake news, false propaganda; misinformation, misrepresentation or suppression of facts

  4. lack of art & creativity, lack of music; degrading, insult of or disrespect to art & creativity; degrading, insult of or disrespect to music;

  5. arrogance, bullying & harassment

 

Oh Goddess Saraswatii!

This Basant Panchamii, with THE ADVENT OF SPRING

let blossom, spread, and prosper & acknowledgement, resect & reverence & celebration of
the five elements – five principles/values/virtues –

  1. right & true knowledge & learning, proper and empowered education,

  2. true & correct concepts, ideas & perception; true & proper words & language, conduct & morality

  3. true and correct news, information & facts with true and correct representation

  4. art, music & creativity; originality

  5. truth, truthfulness & honesty, integrity & righteousness, ethics & conduct and humility

 

anigif_MyPrayer_BasantPanchami_22Jan2018

हे माँ सरस्वती!
इस बसंत पंचमी में,
दूर हो बस अंत हो
१) अज्ञान ओ निरक्षरता, कुबिद्या/कुविद्या तथा कुशिक्षा
२) अपशब्द, कुशब्द; तथा कुभाषा ओ अपभाषा; दुराचरण
३) भूल एबं मिथ्या-धारणा, मिथ्या, मिथ्या तथ्य ओ अपप्रचार तथा मिथ्या सम्बाद
४) कला ओ संगीत का अपमान या हानि
५) अहंकार, तर्जन, बदमाशी ओ उत्पीड़न

 

हे माँ सरस्वती!
इस बसंत पंचमी में, वसंत के आगमन के
साथ ही साथ
हर्ष ओ उल्लास के साथ ही
आगमन हो,
फुल्लित, प्रफुल्लित, कुसुमित तथा बिकाश, प्रसार, प्रचार ओ उन्नति तथा समृद्धि एबं आदर, श्रद्धा ओ सम्मान हो
पंच तत्त्व पांच मूल्यों का
सठिक और सशक्त
१) सठिक और उचित ज्ञान एबं विद्या; ओ सठिक ओ सशक्त शिक्षा
२) शब्द; भाषा एबं उचित भाषा; तथा आचरण / सदाचरण
३) सठिक धारणा, तथ्य, सुप्रचार; तथा सठिक ओ सत्य सम्बाद एबं तथ्य उपस्थापना
४) कला, रचना ओ रचनात्मकता तथा संगीत / सुसंगीत; मौलिकता तथा स्वतन्त्रता
५) सत्य, सत्यता / सत्यवादिता; सत्यनिष्ठा ओ अखंडता; सदाचरण; तथा नम्रता

~ प्रबीण कुमार पति

 

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~ Prabeen Kumar Pati